Nanhi Zindagi
वो नन्हे पक्षियों की चहक, सुबह की पहली किरण जैसे थी |वो बगुलों से भरा पेड़ मानो किसी बर्फ की चादर से ढका हुआ हो |उस खूबसूरत दृश्य को देखने रोज़ अपने छत पर जाती थी |
उनकी खूबसूरती वो चेहेक, नयी ज़िन्दगी की शुरुआत बहुत सुकून देती थी मुझे|
वो पक्षी जो सुबह होते ही निकल जाते खाने की तलाश में और लौटते शाम को उन्हें देखकर जब वो बच्चे चेहेकना शुरू कर देते | मैं साक्षी बन चुकी थी ,उनके बढ़ते बच्चों की ज़िंदगी की |
इस तरह सिलसिला चलता रहा ,एक दिन किसी काम से बाहर जा कर जब मैं घर लौटी छत पर गई मानो जैसे किसी भूकंप के बाद का कोई दृश्य मेरे सामने हो सब कुछ बंजर, बिखरा हुआ, शांत मगर चीखता हुआ, सब कुछ उजड़ा हुआ वो पक्षियों की लाशें, मेरे गिरते आंसू जैसे पूछ रहे हो की यहाँ ऐसा क्या हुआ ?
हम इंसान समझते है की ज़िंदगी जीने का हक़ सिर्फ हमें है | हम ही यहाँ अकेले प्राणी है जो नयी सुबह और डूबते सूरज के हक़दार है ,यहाँ सबकुछ हमारा है| ज़िंदगियों की कीमत तो सिर्फ इंसान की होती है, वो बेज़ुबान जानवर कहा दर्द महसूस कर पाता है, इनको कहा निवालो की ज़रूरत होती है| पेट तो सिर्फ हम अपना भरना जानते है|
जहाँ उन लोगो को लगता था की ये भद्दे और बदबूदार पक्षी उनके आँगन और पेड़ गन्दा कर रहे है उन्हें क्या पता अब ये जो मायें लौटी है खाना लेकर उनकी हैरान आँखें पूछ रही है , उनके बच्चों का कसूर |
कितनी अलग सोच है ना मैंने तो हमेशा पक्षियों के लिए पानी रखना सीखा था ,इन्होने पक्षियों के लिए बन्दूक |
खैर मेरी नज़रे आज भी उस बंजर पेड़ की तरफ किसी नयी ज़िंदगी को तलाशती हुई चली ही जाती है |
_sakshi_
Wrote really well👍❤💯
ReplyDeleteWrote really well👍❤💯
ReplyDeletePerfect wrote 💯🙏🏻❤️🧿
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